नया ब्रह्माण्ड

 
 
विस्कटलेल्या आसमंतात आणि विखुरलेल्या अवकाशात शून्य गुरुत्वाकर्षणशक्तीची वेळ येतेच आणि JWM चा 'ठाए'  Dialogue  आपल्या मदतीला धावून येतो. 'इससे बुरा कुछ हो नही सकता। अब सिर्फ अच्छा हो सकता हैं और होगा....

 


मुट्ठी बंद कर रखता अगर समझता ये दिन फ़िर न आएंगे।
आँख दबीही रखता अगर पता होता फिर ख़्वाब रात न सजाएंगे।

दोस्तों के साथ खिलखिलाते दिन
गुनगुनाते नग़मे और आस भरा मन
मुश्किलोंकी चोटियाँ पार करने की उमंग
गहरे समुन्दरसी  अद्भुतता के  ललचाते तरंग
ब्रह्माण्डकी गुश्ती सुलझाने की लगन
नए दिशाकी ख़ोजमे उलझा हुआ जीवन

पता नहीं दिन कैसे कैसे निकल जाते थे
भावनाओंकी हिंदोलोंमे गोते हम खाते थे
ठेंस  ख़ाके भी चोंट न कभी लगती थी
बड़ी नूरानी सी जिंदगी बीतती रहती थी

हवा के झोंकोंपे लहरातें बालोंसी सहज़ जिन्दगी
पानी में घुलते रंगोंसी तरल भी ये जिन्दगी 
अचानक बांध पे नदी की तरह थम सी गयी हैं 
ठण्ड में तालाब जैसी जम भी गयी हैं 
 
शायद पत्थर की मार भी एक तरंग न ला सके
और सूरज की किरन भी चमक फ़ैला न सके 
 
अदब की दीवारोंमे सिकुड़सी गयी हैं 
दुनियाँकी रंजिशोंमे उलझसी गयी हैं 
अब तो मनकी बात कहना भी पाप हैं 
कुछ अलग सोचें तो खुदगर्ज़ ही आप हैं
 
अब......  
 
अब परवाह नहीं हैं घूरती निगाहकी 
न परेशानी दे कुनकुनाते बोल भी 
 
इस मोड़पे मन सोंचे ठहर ही जाऊँ 
जरासी शान्ति बटोर ही लाऊँ 
 
सोच भला खोनेको बाकीही  क्या हैं 
देख आगे हर नज़ारा रंग भरा हैं 
 
कोई हो न हो साथ तेरे वोही समां  हैं 
वहीं  आकाश वहीं समन्दर वही हवा हैं 
पार कीए चट्टानोंकी ले बुलंदी तू 
अपने लिए नया ब्रह्मांड खुद ही रचालें तू
 
पौर्णिमा  ढेरे 
 

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